दोनों तरह के ERP अपने-अपने उद्देश्य में अच्छे हैं। इसलिए उपयोगी सवाल यह नहीं है कि आम तौर पर कौन-सा बेहतर है, बल्कि यह है कि आपके कारोबार में कौन-सा सही बैठता है। और इसका जवाब सॉफ़्टवेयर से कहीं ज़्यादा आपके काम के स्वरूप पर निर्भर करता है।
दोनों में मुख्य अंतर क्या है?
स्टैंडर्ड ERP उन सामान्य प्रक्रियाओं के लिए बना बिज़नेस सॉफ़्टवेयर है जो लगभग हर कंपनी में एक जैसी होती हैं: अकाउंट्स, खरीद, बिक्री, इन्वेंटरी और पेरोल। इसे आपके लिए कॉन्फ़िगर किया जाता है, और आपके काम की जो भी प्रक्रिया इससे अलग होती है उसे ऊपर से 'कस्टमाइज़ेशन' के रूप में जोड़ा जाता है।
डोमेन-स्पेसिफ़िक ERP किसी एक विशेष उद्योग की प्रक्रियाओं, शब्दावली और नियमों के इर्द-गिर्द बनाया जाता है। जो चरण उस कारोबार को विशिष्ट बनाते हैं, वे पहले दिन से ही मूल प्रोडक्ट का हिस्सा होते हैं।
ख़ुद से पूछने योग्य छह सवाल
- 1. आपके रोज़मर्रा के काम का कितना हिस्सा ख़ास आपके उद्योग से जुड़ा है? आपके कर्मचारी रोज़ जो दस मुख्य काम सबसे ज़्यादा करते हैं, उनकी सूची बनाइए। यदि लगभग सभी काम सामान्य खरीद, बिक्री और पेमेंट के हैं, तो स्टैंडर्ड ERP पर्याप्त है। लेकिन यदि उनमें से कई काम आपके उद्योग के विशिष्ट हैं, तो उन्हें अलग से नोट कर लीजिए।
- 2. आज आपका असली काम कहाँ होता है?**** यदि आपके काम के सबसे ज़रूरी चरण आज भी कागज़ी रजिस्टरों, एक्सेल स्प्रेडशीट और WhatsApp संदेशों पर चल रहे हैं क्योंकि आपका मौजूदा सॉफ़्टवेयर उन्हें संभाल नहीं पाता, तो ठीक इसी कमी को पूरा करने के लिए डोमेन ERP बना है।
- 3. आपके कर्मचारी कामकाज में कौन-से शब्द इस्तेमाल करते हैं? जब कर्मचारियों को अपने कारोबार के परिचित शब्दों को छोड़कर स्क्रीन के सामान्य तकनीकी शब्दों में एंट्री करनी पड़ती है, तो गलतियाँ बढ़ती हैं। जो सॉफ़्टवेयर उनके कामकाज की अपनी भाषा बोलता है, उसे अपनाना कहीं आसान होता है।
- 4. हिसाब-किताब कौन रखेगा?**** यदि आपके पास अलग से अकाउंट्स टीम है, तो स्टैंडर्ड ERP की अकाउंटिंग उनके लिए उपयुक्त रहेगी। लेकिन यदि मालिक और ऑपरेटर स्वयं लेन-देन दर्ज करते हैं, तो ऐसा ERP कहीं अधिक उपयोगी साबित होता है जो कारोबारी एंट्री से अपने-आप सही अकाउंटिंग पोस्ट कर दे।
- 5. पाँच वर्षों में कुल कितनी लागत आएगी? प्रति यूज़र सालाना लाइसेंस फ़ीस, इम्प्लीमेंटेशन, कस्टमाइज़ेशन और अपग्रेड के कारण कस्टमाइज़ेशन पर बार-बार होने वाले खर्च को जोड़िए। फिर उसकी तुलना सब्सक्रिप्शन, अपने सर्वर या एकमुश्त खरीद के विकल्पों से कीजिए।
- 6. आपका डेटा कहाँ रहना चाहिए? कुछ व्यवसाय वेंडर के क्लाउड पर संतुष्ट रहते हैं, जबकि कुछ को अपना डेटा अपने ही परिसर के सर्वर (On-premise) पर चाहिए होता है। जाँचिए कि कौन-सा विकल्प आपको यह सुविधा देता है।
निर्णय लेने के लिए एक सरल तालिका
| सवाल | स्टैंडर्ड ERP कब चुनें | डोमेन ERP कब चुनें |
|---|---|---|
| काम की विशिष्टता | उद्योग-विशेष के ख़ास चरण बहुत कम हैं | मुख्य काम के कई चरण ख़ास आपके उद्योग से जुड़े हैं |
| काम कहाँ चलता है | ज़्यादातर काम मौजूदा सॉफ़्टवेयर में ही हो जाता है | अहम काम आज भी रजिस्टरों और एक्सेल शीट्स में रहते हैं |
| स्क्रीन पर शब्दावली | सामान्य व्यापारिक शब्द चल जाते हैं | कर्मचारियों के लिए आपके उद्योग के अपने शब्द ज़रूरी हैं |
| हिसाब-किताब (Bookkeeping) | अलग से प्रशिक्षित अकाउंट्स टीम मौजूद है | मालिक और ऑपरेटर स्वयं लेन-देन दर्ज करते हैं |
| पाँच वर्षों की कुल लागत | कस्टमाइज़ेशन की बहुत कम ज़रूरत है | स्टैंडर्ड ERP लेने पर भारी कस्टमाइज़ेशन कराना पड़ेगा |
| डेटा रखने की जगह | वेंडर का क्लाउड स्वीकार्य है | अपना सर्वर या होस्टिंग चुनने की आज़ादी चाहिए |
यदि आपके ज़्यादातर जवाब बीच वाले कॉलम में आते हैं, तो स्टैंडर्ड ERP आपके लिए समझदारी भरा विकल्प है। लेकिन यदि ज़्यादातर जवाब दाईं ओर वाले कॉलम में आते हैं, तो आपको डोमेन ERP पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
दोनों विकल्पों में सावधानी के संकेत
- कस्टमाइज़ेशन लगातार बढ़ता जा रहा है: यदि आपके मुख्य काम को संभालने के लिए स्टैंडर्ड ERP में बार-बार कस्टम बदलाव कराने पड़ रहे हैं, तो संभवतः आप एक महँगे और जटिल रास्ते से अपना डोमेन ERP बनवाने का खर्च उठा रहे हैं।
- वेंडर को आपके व्यवसाय की ज़मीनी समझ नहीं है: जिस टीम ने कभी आपके उद्योग में काम नहीं किया, उसका “डोमेन ERP” केवल लेबल लगा हुआ एक साधारण कस्टम सॉफ़्टवेयर होता है।
- कोई आपकी कार्य-प्रक्रिया के बारे में नहीं पूछता: किसी भी प्रकार का वेंडर यदि यह समझे बिना कोटेशन दे देता है कि आपका काम वास्तव में कैसे चलता है, तो वह केवल अंदाज़ा लगा रहा है।
यदि आप नया ERP अपनाने का फ़ैसला करते हैं
आप चाहे जो भी विकल्प चुनें, सफलता का बड़ा हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि आप बदलाव कैसे करते हैं। शुरुआत एक यूनिट या एक प्रक्रिया से कीजिए और कुछ समय तक नए सिस्टम को पुराने के साथ-साथ चलाइए। पहले केवल ओपनिंग बैलेंस (Opening Balances) और चालू रिकॉर्ड्स नए सिस्टम में लाइए, और पुराने रिकॉर्ड्स को आर्काइव (Archive) में रखिए। सिर्फ़ रिपोर्ट पढ़ने वाले मैनेजरों को ही नहीं, बल्कि डेटा एंट्री करने वाले कर्मचारियों को भी पूरा प्रशिक्षण दीजिए। चरणबद्ध बदलाव कागज़ पर थोड़ा लंबा दिखता है, लेकिन व्यवहार में हमेशा कम समय और कम परेशानी में पूरा होता है।
किसी भी ERP वेंडर से पूछने योग्य 5 सवाल
- 1. क्या आप हमारे ही सैंपल डेटा का उपयोग करके हमारे कारोबार की तीन सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ अपने सिस्टम में चलाकर दिखा सकते हैं?
- 2. जब आप सॉफ़्टवेयर का नया अपग्रेड जारी करेंगे, तो हमारे लिए किए गए कस्टमाइज़ेशन का क्या होगा?
- 3. इसमें अकाउंटिंग कैसे दर्ज होती है: क्या उसके लिए अकाउंटेंट को अलग से एंट्री करनी पड़ती है, या कारोबारी लेन-देन से वह अपने-आप पोस्ट होती है?
- 4. अगले पाँच वर्षों में हमें हर साल कुल कितना और किन-किन मदों में भुगतान करना होगा?
- 5. क्या हम अपना सारा डेटा खुले फ़ॉर्मेट (Excel/CSV) में कभी भी एक्सपोर्ट कर सकते हैं, और यदि भविष्य में हमें सेवा बंद करनी पड़े तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी?
हमारी ईमानदार राय
यदि आपका कारोबार सामान्य ट्रेडिंग या सेवाओं का है और उसमें कोई विशेष प्रक्रिया नहीं है, तो स्टैंडर्ड ERP आपके लिए उपयुक्त रहेगा — और हम आपको साफ़ तौर पर यही सलाह देंगे। लेकिन जहाँ किसी व्यवसाय का मुख्य काम सामान्य साँचे में नहीं बैठता, वहाँ हम अपने परखे हुए कोर प्लेटफ़ॉर्म पर (प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के साथ डिज़ाइन किए गए अकाउंटिंग इंजन सहित) डोमेन ERP बनाते हैं — ताकि आप मुख्य रूप से केवल उसी के लिए भुगतान करें जो आपके कारोबार में अनोखा है।
