डिज़ाइन थिंकिंग: ऐसे सिस्टम जिन्हें लोग वास्तव में इस्तेमाल करते हैं

संक्षेप में

डिज़ाइन थिंकिंग समस्या सुलझाने की ऐसी पद्धति है जो टेक्नोलॉजी से नहीं, बल्कि सिस्टम इस्तेमाल करने वाले लोगों से शुरू होती है। Neodeus हर प्रोजेक्ट में इसके पाँच चरण अपनाता है: समझना (Empathise), समस्या को परिभाषित करना (Define), समाधान गढ़ना (Ideate), प्रोटोटाइप (Prototype) और परीक्षण (Test)। इसीलिए हमारा बनाया सॉफ़्टवेयर लोगों के रोज़मर्रा के कामकाज में सहजता से फ़िट बैठता है।

यह क्यों ज़रूरी है?

ज़्यादातर असफल सॉफ़्टवेयर सिस्टम्स में कोडिंग तो सही होती है, लेकिन समस्या की समझ ही गलत होती है। किसी क्लर्क को वही डेटा बार-बार भरना पड़े, किसी अधिकारी को ज़रूरी रिपोर्ट न मिले, या कोई किसान अपनी रसीद न समझ पाए — ये सब डिज़ाइन की चूक हैं। सिस्टम बनने के बाद इन्हें सुधारने के बजाय शुरू में ही रोक लेना कहीं सस्ता और आसान पड़ता है।

पाँच चरण, जैसे हम उन्हें व्यवहार में लाते हैं

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    1. समझना (Empathise)

    हम क्या करते हैं

    दफ़्तर, फ़ैक्टरी या सीधे फ़ील्ड में जाना। वरिष्ठ नेतृत्व से लेकर फ़्रंट-लाइन कर्मचारियों और आम नागरिकों तक, काम करने वाले लोगों के काम को देखना और उनसे बात करना।

    आपको क्या मिलता है

    फ़ील्ड नोट्स, यूज़र प्रोफ़ाइल, मौजूदा कार्य-प्रक्रिया का नक्शा (User Journey Map) और उसकी असली दिक़्क़तें।

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    2. परिभाषित करना (Define)

    हम क्या करते हैं

    जो बातें सामने आईं, उन्हें नेतृत्व की सहमति से एक स्पष्ट 'प्रॉब्लम स्टेटमेंट' और मापे जा सकने वाले नतीजों में बदलना।

    आपको क्या मिलता है

    स्पष्ट प्रॉब्लम स्टेटमेंट, सफलता के पैमाने और काम का दायरा (Scope)।

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    3. समाधान गढ़ना (Ideate)

    हम क्या करते हैं

    यूज़र्स और निर्णय लेने वाले अधिकारियों के साथ वर्कशॉप में बैठकर समाधान के विकल्प तैयार करना; प्रक्रियाएँ सरल बनाना; नियमों और डेटा मॉडल का मसौदा बनाना।

    आपको क्या मिलता है

    सर्वसम्मति से तय समाधान की रूपरेखा और भविष्य की सरल कार्य-प्रक्रिया।

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    4. प्रोटोटाइप (Prototype)

    हम क्या करते हैं

    भारी कोडिंग या डेवलपमेंट शुरू करने से पहले, तेज़ी से क्लिक की जा सकने वाली स्क्रीन्स और सैंपल डेटा तैयार करना।

    आपको क्या मिलता है

    काम करने वाले प्रोटोटाइप (Working Prototypes), जिन्हें आप ख़ुद चलाकर देख सकते हैं।

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    5. परीक्षण (Test)

    हम क्या करते हैं

    प्रोटोटाइप को असली यूज़र्स के सामने रखना, यह देखना कि वे कहाँ अटकते हैं, और तुरंत सुधार करना। जब तक काम बिल्कुल सहज न हो जाए, यह प्रक्रिया दोहराना।

    आपको क्या मिलता है

    यूज़ेबिलिटी टेस्टिंग के निष्कर्ष और असली यूज़र्स द्वारा परखा हुआ डिज़ाइन।

हमारी डिलीवरी प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा

  • डिज़ाइन थिंकिंग हमारी कार्य-पद्धति के आइडिएशन और डिज़ाइन चरणों को आकार देती है, और हर नई रिलीज़ के समय फिर से इस्तेमाल होती है।
  • हर प्रोडक्ट रिलीज़ होने से पहले स्टेज-गेट के रूप में यूज़र-एक्सपीरियंस (UX) समीक्षा से गुज़रता है।
  • हम भारत की ज़मीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन करते हैं: कई भाषाएँ, कम इंटरनेट स्पीड (Low Bandwidth), साझा डिवाइस और कंप्यूटर पर पहली बार काम करने वाले लोग।
  • हमारे नेतृत्व ने 'Interaction Design Foundation' से डिज़ाइन थिंकिंग और UX डिज़ाइन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या डिज़ाइन थिंकिंग से प्रोजेक्ट का समय बढ़ जाता है?

इसके विपरीत, यह कुल समय बचाती है। शुरुआत में खोज और प्रोटोटाइपिंग पर लगाए गए कुछ हफ़्ते, लॉन्च के बाद होने वाले महीनों के दोबारा काम (Rework) को बचा लेते हैं।

क्या आप हमारी टीम के लिए अलग से डिज़ाइन थिंकिंग वर्कशॉप कर सकते हैं?

जी हाँ। हम वरिष्ठ नेतृत्व, कर्मचारियों और यूज़र्स के साथ प्रॉब्लम डिस्कवरी और को-क्रिएशन वर्कशॉप करते हैं — किसी प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में भी और स्वतंत्र रूप से भी।

हमें बताइए, आप कौन-सी समस्या हल करना चाहते हैं।

हम पूरी ईमानदारी से बताएँगे कि हम आपकी मदद कैसे कर सकते हैं — या यह भी कि हम मदद नहीं कर सकते।

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